कभी सोचा है कि खेतों में बची पराली (paddy straw) से ही गांवों और शहरों की लाइट्स जल सकती हैं? यही काम कर रही है DEE Development Engineers Ltd (DDEL) की सब्सिडियरी Malwa Power Pvt. Ltd (MPPL)। हाल ही में इस कंपनी को एक बड़ा रेग्युलेटरी राहत मिला है।

क्या है मामला?
MPPL का Power Purchase Agreement (PPA) Punjab State Power Corporation Ltd (PSPCL) के साथ 27 अप्रैल 2025 को खत्म हो गया था।
- PSPCL ने PPA को 10 साल बढ़ा तो दिया, लेकिन टैरिफ अपने हिसाब से Rs 3.50/unit तय कर दिया
- MPPL ने आपत्ति जताते हुए कहा कि PPA के Clause 12.1.0 के मुताबिक टैरिफ तय करने का अधिकार Punjab State Electricity Regulatory Commission (PSERC) के पास है
- मामला PSERC तक पहुंचा
Commission का फैसला
18 सितम्बर 2025 को PSERC ने MPPL के पक्ष में कई अहम बातें साफ कीं:
- PPA का 10 साल का एक्सटेंशन वैध है
- PSPCL के पास खुद से टैरिफ तय करने का अधिकार नहीं है
- नया टैरिफ सिर्फ़ PSERC ही तय करेगा
अब अगली सुनवाई 6 नवम्बर 2025 को होगी, जहां final tariff का ऐलान होगा।
कंपनी का नजरिया
DDEL की मैनेजमेंट इस ऑर्डर से काफ़ी पॉज़िटिव है। कंपनी का मानना है कि:
- पहले Rs 3.50/unit का रेट बिना due process के तय किया गया था
- PSERC का consistent तरीका है कि वो variable cost + fixed cost दोनों देखकर टैरिफ फाइनल करता है
- उम्मीद है कि इस बार MPPL को ज्यादा equitable और fair tariff मिलेगा
साथ ही, कंपनी ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में भी एक अलग अपील दायर की है, जहां उसके 8 MW बायोमास प्रोजेक्ट के variable cost को घटाने वाले पुराने ऑर्डर को चैलेंज किया गया है।
हाल ही का बड़ा ऑर्डर
रेग्युलेटरी अपडेट्स के साथ-साथ बिज़नेस मोर्चे पर भी DDEL मज़बूत दिख रही है। हाल ही में कंपनी को Rs 170 करोड़ का domestic order मिला है।
- क्लाइंट: एक पब्लिक सेक्टर undertaking (power sector)
- स्कोप: करीब 1,900 MT critical piping supply
- Timeline: 9–15 महीने
- Payment: 90% within 90 days of site acceptance, बाकी 10% order completion पर
कंपनी की प्रोफाइल
- बिज़नेस: Specialised process piping solutions (oil & gas, power, chemicals)
- स्किल: Design से लेकर manufacturing तक end-to-end solutions
- Global footprint: Canada, Thailand, USA समेत कई देशों से revenue
- Installed capacity: इंडिया में सबसे बड़ा player
- Order book (June 2025): Rs 1,227 करोड़
- Market Cap: Rs 1,900+ करोड़
- Stock: 52-week low Rs 166.60 से 86% ऊपर
क्यों अहम है ये फैसला?
- Biomass प्रोजेक्ट्स किसानों की पराली burning problem का हल देते हैं
- Renewable energy और rural economy दोनों को सपोर्ट
- अगर PSERC टैरिफ बढ़ाता है, तो MPPL के revenue और profitability पर सीधा असर होगा
- DDEL का order pipeline और regulatory clarity दोनों company की growth story को मजबूत बनाते हैं
निष्कर्ष
DDEL को मिला ये रेग्युलेटरी बूस्ट सिर्फ़ एक कानूनी जीत नहीं, बल्कि biomass energy sector के लिए एक encouraging संकेत है। आने वाले महीनों में final tariff का फैसला कंपनी के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है