डेटा सेंटर बिजनेस में मची धूम  Adani, Ambani और Amazon लगा रहे हैं हज़ारों करोड़

आपने कभी सोचा है कि जब आप WhatsApp पर मैसेज भेजते हैं, Netflix पर मूवी देखते हैं, या Google पर कुछ सर्च करते हैं, तो यह सारा डेटा कहाँ जाता है? यह सारा डेटा स्टोर होता है डेटा सेंटर्स में। और अभी भारत में यह बिजनेस आग लगा रहा है। Adani, Ambani और Amazon जैसी बड़ी कंपनियां इसमें हज़ारों करोड़ रुपये लगा रही हैं।

डेटा सेंटर क्या है?

डेटा सेंटर को आप एक बहुत बड़ा डिजिटल गोदाम समझ सकते हैं। जैसे आप अपना सामान किसी गोदाम में रखते हैं, वैसे ही कंपनियां अपना डिजिटल डेटा इन डेटा सेंटर्स में रखती हैं। इनमें हजारों कंप्यूटर सर्वर लगे होते हैं जो 24 घंटे चलते रहते हैं। इन्हें चलाने के लिए बिजली की बहुत जरूरत होती है और इन्हें ठंडा रखने के लिए खास कूलिंग सिस्टम लगे होते हैं।

भारत में बढ़ रहा डेटा सेंटर बिजनेस?

इसके 3 मुख्य कारण हैं:

पहला कारण है डिजिटल इंडिया की बढ़ती ताकत। आज भारत में 83 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। हर व्यक्ति हर महीने औसतन 20 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है। UPI के जरिए लेन-देन बढ़ा है, ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, और ई-कॉमर्स में तेजी आई है। इस सबके लिए डेटा स्टोरेज की जरूरत पड़ती है।

दूसरा बड़ा कारण है सरकार की नीतियां। सरकार ने कई नियम बनाए हैं जिसके तहत भारतीयों का डेटा भारत में ही स्टोर होना चाहिए। इस Data Localization के नियम ने डेटा सेंटर बिजनेस को बहुत बढ़ावा दिया है।

तीसरा कारण है क्लाउड टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल। छोटे-बड़े सभी बिजनेस अब क्लाउड पर शिफ्ट हो रहे हैं। कोरोना के बाद तो Work From Home ने इसकी डिमांड और बढ़ा दी है।

बड़ी कंपनियों के बड़े प्लान

Adani Group ने 50,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान बनाया है। वे चेन्नई, नवी मुंबई और नोएडा में डेटा सेंटर बना रहे हैं। Reliance Jio ने 75,000 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट की घोषणा की है। Amazon Web Services तो 1,05,600 करोड़ रुपये लगा रहा है। Microsoft भी पीछे नहीं है, वह 90,000 करोड़ रुपये खर्च करेगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

डेटा सेंटर सेक्टर में ग्रोथ का मतलब है कई कंपनियों के लिए नए मौके। जो कंपनियां डेटा सेंटर बना रही हैं, उनके शेयर्स में लंबे समय में ग्रोथ की संभावना है। साथ ही, जो कंपनियां डेटा सेंटर्स के लिए इक्विपमेंट बनाती हैं, जैसे पावर बैकअप सिस्टम, कूलिंग सिस्टम, सर्वर रैक्स – उनके बिजनेस में भी तेजी आएगी। रियल एस्टेट कंपनियों को भी फायदा होगा क्योंकि डेटा सेंटर्स के लिए बड़ी जगह की जरूरत होती है।

हालांकि, इस सेक्टर में कुछ चुनौतियां भी हैं। डेटा सेंटर्स को बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है। एक डेटा सेंटर एक छोटे शहर जितनी बिजली खपत कर सकता है। कूलिंग के लिए पानी की भी बहुत जरूरत पड़ती है। इसलिए जिन कंपनियों के पास पावर और वाटर मैनेजमेंट की अच्छी व्यवस्था है, वे ज्यादा सफल होंगी।

भविष्य क्या कहता है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2028 तक भारत का डेटा सेंटर मार्केट 10 लाख करोड़ रुपये से भी बड़ा हो सकता है। आने वाले समय में 5G टेक्नोलॉजी, Artificial Intelligence और Internet of Things के बढ़ने से डेटा की मांग और बढ़ेगी। सरकार की 100 स्मार्ट सिटीज योजना भी इस सेक्टर के लिए बहुत बड़ा अवसर लेकर आएगी।

आखिरी बात

डेटा सेंटर का बिजनेस सुनने में जितना टेक्निकल लगता है, उतना है नहीं। यह बिल्कुल रियल एस्टेट के बिजनेस जैसा है। जैसे रियल एस्टेट में आप जमीन और बिल्डिंग किराए पर देते हैं, वैसे ही डेटा सेंटर में आप डिजिटल स्पेस किराए पर देते हैं। भारत के डिजिटलाईजेशन के साथ यह बिजनेस तेजी से बढ़ेगा और निवेशकों के लिए अच्छे मौके लेकर आएगा। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले अपने रिसर्च जरूर करें।

1 thought on “डेटा सेंटर बिजनेस में मची धूम  Adani, Ambani और Amazon लगा रहे हैं हज़ारों करोड़”

Leave a Comment