IRFC ने पावर प्रोजेक्ट्स के लिए उठाए 16,489 करोड़ रुपये, शेयर में तेजी

भारतीय रेलवे की वित्तीय भुजा IRFC (Indian Railway Finance Corporation) एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी ने दो बड़े थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए 16,489 करोड़ रुपये का लोन एग्रीमेंट साइन किया है। इस खबर के बाद कंपनी का शेयर 1.4% चढ़कर 126.05 रुपये पर पहुंच गया।

क्या है पूरा मामला?

IRFC ने दो अलग-अलग स्टेट पावर कंपनियों के साथ लोन एग्रीमेंट साइन किए हैं। पहला एग्रीमेंट हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन के साथ 5,929 करोड़ रुपये का है। यह लोन यमुनानगर में 800 MW के नए थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए है। दूसरा एग्रीमेंट महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के साथ 10,560 करोड़ रुपये का है, जो नागपुर के कोराडी पावर प्लांट के एक्सपेंशन के लिए इस्तेमाल होगा।

IRFC का बिजनेस मॉडल समझें

IRFC भारतीय रेलवे की वित्तीय भुजा है। कंपनी का काम रेलवे के लिए पैसा जुटाना है। जब रेलवे को नई ट्रेनें, कोच या इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना होता है, तो IRFC उसके लिए फंड्स अरेंज करती है। अब कंपनी ने अपना दायरा बढ़ाते हुए पावर प्रोजेक्ट्स में भी फंडिंग शुरू कर दी है।

पावर और रेलवे का कनेक्शन

यह फंडिंग सिर्फ पावर प्रोजेक्ट्स के लिए ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से रेलवे के फायदे के लिए भी है। दरअसल, थर्मल पावर प्लांट्स को कोयले की जरूरत होती है जो रेलवे के जरिए पहुंचता है। साथ ही, बिजली बनने के बाद वही बिजली रेलवे के ऑपरेशन्स में इस्तेमाल होती है। इस तरह यह एक सर्कुलर इकोनॉमी का काम करता है।

कंपनी का फाइनेंशियल हालत

IRFC का वित्तीय प्रदर्शन काफी मजबूत है। Q1 FY25-26 में कंपनी का राजस्व 6,915 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 2.21% ज्यादा है। नेट प्रॉफिट 1,746 करोड़ रुपये रहा, जो 10.7% की ग्रोथ दर्शाता है।

कंपनी की Assets Under Management (AUM) में 98.46% एक्सपोजर रेल मंत्रालय को है, जिसका मतलब है कि क्रेडिट रिस्क बहुत कम है। AUM का 37.71% हिस्सा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में, 31.60% रोलिंग स्टॉक में और 29.15% प्रोजेक्ट एसेट्स में लगा हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

IRFC के लिए यह एक स्ट्रैटेजिक मूव है। कंपनी अब सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं रहना चाहती। पावर प्रोजेक्ट्स में फंडिंग करके वह अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई कर रही है। इससे भविष्य में कंपनी की कमाई के सोर्स बढ़ेंगे।

हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि IRFC का बिजनेस अभी भी largely रेलवे पर डिपेंडेंट है। नए प्रोजेक्ट्स में रिस्क और रिटर्न दोनों ही अलग होंगे। सरकारी कंपनी होने के नाते इसे फंडिंग में आसानी रहती है, लेकिन इंटरेस्ट रेट के उतार-चढ़ाव का असर भी पड़ता है।

भविष्य की संभावनाएं

भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी के साथ IRFC जैसी फाइनेंस कंपनियों की भूमिका बढ़ती जाएगी। रेलवे का विस्तार, नए वंदे भारत ट्रेनें और अब पावर प्रोजेक्ट्स – सभी के लिए फंडिंग की जरूरत पड़ेगी। IRFC की स्थिति इस मामले में काफी मजबूत है क्योंकि उसे रेलवे का बैकिंग मिला हुआ है।

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